कुदरत के साथ बनाए तालमेल

हम अकसर ऐसा सोचते हैं कि हालात पर काबू पा लेंगे, लेकिन वास्तविकता में प्रकृति के अपने ही नियम-कायदे हैं। प्रकृति के उन्हीं नियमों पर यह संसार चलता है और जब हम ‘मैं’ की भावना को अपने अंदर से निकालकर कुदरत के नियमों के साथ तालमेल बिठाना सीख लेते हैं, तो जीवन सरल और सुखमय हो जाता है।कुदरत के नियमों के साथ तालमेल बिठाकर रखना मानसिक शांति की सबसे पहली शर्त है। जीवन, इंसान के बनाए नियमों पर ही नहीं चलता, उसके अपने भी नियम-कायदे हैं। जीवन के साथ तभी सही से निभ पाती है, जब हम उसके नियमों का भी सम्मान करते हैं।जब हम ‘मैं’ की भावना त्यागकर और स्वयं को पीछे रख कर उस परम शक्ति के नियमों को स्वीकार कर लेते हैं, तो हम ब्रह्मांड का एक अभिन्न हिस्सा बन जाते हैं। यही प्रकृति की मर्जी भी है कि प्रत्येक इंसान उसके बनाए नियमों का पालन करे, क्योंकि जब हम स्वयं के बारे में सोचते हैं, तब हमारा इस ब्रह्मांड से सरोकार खत्म हो जाता है और हमारे भीतर अहंकार जन्म लेने लगता है। असलियत यह है कि हम में से प्रत्येक व्यक्ति जो भी कार्य करता है, उसका परोक्ष और अपरोक्ष रूप में इस सारे ब्रह्मांड पर असर पड़ता है।
किसी भी स्थिति को लेकर अपने मन से विरोधी या प्रतिरोधी विचार बाहर निकाल दें। जो जिस समय घटित हो रहा है, अगर आप उसे नहीं स्वीकारते हैं तो उसका अर्थ यह है कि आप प्रकृति के नियमों के विरुद्ध जाना चाहते हैं। हो सकता है कि मौजूदा स्थिति के सामने समर्पण कर देना आपको अपनी कमजोरी का एहसास दिलाए, पर असल में ऐसा करना इस बात का सूचक है कि आप मौजूदा हालातों को महसूस कर रहे हैं और उनसे तालमेल बिठाने की कोशिश कर रहे हैं। .

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About the Author: RastraPratham Admin

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